रण उत्सव: फेमिना स्टार्स ने महसूस की शांति

श्रेया पूंजा ने कहा- “स्वर्ग की सड़क जैसा एहसास”, रेखा पांडेय ने नो-प्लास्टिक जोन की सराहना की; रण उत्सव में सस्टेनेबल टूरिज्म की मिसाल।

रण उत्सव: फेमिना स्टार्स ने महसूस की शांति
रण उत्सव: फेमिना स्टार्स ने महसूस की शांति

फेमिना मिस इंडिया के विनर्स की अविस्मरणीय रण उत्सव की यात्रा

पिछले दिनों गुजरात का विश्वप्रसिद्ध रन ऑफ़ कच्छ  उस समय और भी अधिक जीवंत हो उठा जब फेमिना मिस इंडिया 2023 की 1st रनर अप श्रेया पूंजा और फेमिना मिस इंडिया 2024 की 1st रनर अप रेखा पांडेय प्रसिद्ध रण उत्सव पहुचे । सफेद नमक के असीम विस्तार के बीच सौंदर्य, संस्कृति और  पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिला।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रण उत्सव की पृष्ठभूमि में दोनों सुंदरीयों ने कच्छ की प्राकृतिक भव्यता और सांस्कृतिक समृद्धि को करीब से महसूस किया। उनका यह दौरा केवल पर्यटन नहीं, बल्कि गुजरात के उभरते हुए “एक्सपीरिएंशियल और सस्टेनेबल टूरिज्म” मॉडल की झलक भी था।

सुनसान रास्तों पर आज़ादी का एहसास

फेस्टिवल की चकाचौंध से दूर, श्रेय और रेखा ने कच्छ के कम चर्चित रेगिस्तानी मार्गों की यात्रा की। दूर-दूर तक फैला सफेद क्षितिज, शांत वातावरण और खुली सड़कें — यह अनुभव किसी सिनेमाई दृश्य से कम नहीं था।
अपने अनुभव को साझा करते हुए श्रेया पूंजा ने कहा , “मैंने कच्छ के कुछ अनजाने रेगिस्तानी रास्तों पर बाइक चलाई और सच कहूं तो ऐसा लगा जैसे स्वर्ग की सड़क पर चल रही हूं। चारों ओर इतनी शांति और खुलापन है कि आप खुद को प्रकृति के बेहद करीब महसूस करते हैं। यहां आने वाला हर यात्री आज़ादी और सुकून का वही एहसास पाएगा।”

उनकी यह यात्रा इस बात का संकेत है कि गुजरात अब एडवेंचर और स्लो ट्रैवल के शौकीनों के लिए नया आकर्षण बनता जा रहा है।

इतिहास से साक्षात्कार

इस यात्रा को ऐतिहासिक आयाम मिला जब दोनों सुंदरीयों ने Dholavira का दौरा किया। यह विश्व धरोहर स्थल सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगरों में से एक रहा है। यहां की उन्नत जल संरक्षण प्रणाली और सुव्यवस्थित शहरी नियोजन आज भी प्राचीन भारत की वैज्ञानिक सोच और पर्यावरणीय समझ का प्रमाण हैं।

संस्कृति, उत्सव और जिम्मेदारी का संगम

रann उत्सव का मुख्य आयोजन स्थल धोरडो गांव है, जिसे UNWTO Best Tourism Village 2023 का सम्मान प्राप्त हो चुका है। यह सम्मान दर्शाता है कि यहां पर्यटन विकास को विरासत संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के साथ जोड़ा गया है।
सफेद रेगिस्तान यहां रंगों के उत्सव में बदल जाता है। कच्छी लोकसंगीत, पारंपरिक नृत्य, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को एक समग्र सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करते हैं।

विशेष बात यह है कि यहां स्थापित टेंट सिटी को “नो-प्लास्टिक ज़ोन” के रूप में विकसित किया गया है। सुव्यवस्थित कचरा प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाएं इस उत्सव को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि टिकाऊ पर्यटन का आदर्श मॉडल बनाती हैं।

रेखा पांडेय ने कहा,
“यहां हर व्यवस्था सोच-समझकर की गई है। नो-प्लास्टिक ज़ोन से लेकर कचरा प्रबंधन तक, सब कुछ जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है। यह अनुभव बताता है कि उत्सव और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।”

जीवंत परंपराएं और शिल्प विरासत

रann उत्सव के अलावा कच्छ के कारीगर गांव, जैसे Gandhi Nu Gam, आज भी सदियों पुरानी कला परंपराओं को संजोए हुए हैं। अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग, कच्छी कढ़ाई और विश्वप्रसिद्ध रोगन आर्ट यहां की पहचान हैं। ये शिल्प केवल कला नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रमाण हैं।

चांदनी रात में सफेद स्वप्न

सूर्यास्त के बाद रण का दृश्य और भी मोहक हो उठता है। चांदनी में चमकती नमक की धरती, लोकधुनों की गूंज और खुले आकाश के नीचे सजी सांस्कृतिक संध्या — यह सब मिलकर एक अविस्मरणीय अनुभव रचते हैं।
कच्छ का रण आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यह उदाहरण है कि किस प्रकार संस्कृति, समुदाय और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन के साथ पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है।

सफेद रण के हृदय में, सौंदर्य को उसका सच्चा प्रतिबिंब मिला — विशाल, उज्ज्वल और कालातीत फेमिना मिस इंडिया विनर्स की यह एक कभी भी न भूलने वाली यात्रा रही।